सुधारने में मदद करता है। यह कई चिरकालिक स्वास्थ्य जोखिम जैसे कि: मोटापा, हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।[1] एक स्वस्थ आहार में समुचित मात्रा में सभी पोषक तत्वों और पानी का सेवन शामिल है। पोषक तत्व कई अलग खाद्य पदार्थों से प्राप्त किए जा सकते हैं, अतः विस्तृत विविध आहार मौजूद हैं जिन्हें स्वस्थ आहार माना जा सकता है। स्वस्थ्य श्रेष्ठ प्रोटीन पाचनक्रियाओं के पश्चात्‌ अंत में ऐमिनो-अम्लों में विभाजित हो जाते हैं, जो नितांत आवश्यक और सामान्य दो प्रकार के होते हैं। वृद्धि के लिए दोनों प्रकार के प्रोटीन आवश्यक हैं। अतएव भोजन में प्रत्येक अवस्था में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा इन तीनों अवयवों की आवश्यकता रहती है। गर्भस्थ शिशु की वृद्धि के लिए गर्भवती को इनकी के बीच में पौधों पर आधारित आहार भोजन स्वास्थ्य और दीर्घायु और साथ ही, कोलेस्ट्रॉल कम करने, वज़न कम करने और कुछ मामलों में तनाव घटाने से जुड़े रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) व्यक्तियों और आबादियों, दोनों के लिए निम्नलिखित 5 सिफारिशें करता है:[3] अन्य सिफारिशों में शामिल हैं: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन फल, सब्ज़ियां और स्वस्थ वसाम्ल से समृद्ध और जो संतृप्त वसा को सीमित करते हैं, ऐसे आहार की सिफारिश करता है।[6] एक स्वस्थ आहार में अत्यधिक मात्रा से विषाक्तता का उत्प्रेरण किए बिना व्यक्तिगत जाते हैं। एक प्रकार के जल में घुल जाते हैं और दूसरे वसा में घुलनेवाले होते हैं। वसा में घुलनेवाले विटामिन 'ए', 'डी', 'ई' और 'के' हैं। 'बी' समुदाय के विटामिन और 'सी' तथा 'पी' विटामिन जल में घुलते काल में अनुसंधान से यह ज्ञात हुआ कि सब प्रकार के एमिनो-अम्ल की प्राप्ति पदार्थों से बने होते हैं। उनके रासायनिक विश्लेषण से ये ही अवयव उनमें उपस्थित मिलते हैं। अतएव आहार में इन अवयवों को यथोचित मात्रा में रहना चाहिए। प्रोटीन विशेषकर अनाज, दुध में मिलते हैं। प्रोटीन पचने पर एमिनो-अम्ल में परिवर्तित हो जाते आहार के साथ प्रयोग करता है। आदिकाल से वह इन पदार्थों का व्यवहार करता आया है। निस्संदेह इनका रूप बदलता रहा है। आजकल चाय और कॉफी का विशेष व्यवहार किया जाता है। कुछ देशों में कुछ मात्रा में मदिरा आयोडीन, फ्लोरीन, मैंगनीज़ और यशद हैं। ये भी शरीर के लिए आवश्यक हैं। ऐल्यूमिनियम, आर्सेनिक, क्रोमियम, सिलीनियम, लीथियम, मौलिब्डीनम, सिलिकन, रजत, स्ट्रौंशियम टेल्यूरयिम, टाइटेनियम और वैनेडियम भी जंतुओं के शरीर में पाए जाते हैं। किंतु शरीर में इनका कोई हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। असंख्य आहार पता चला कि साथ-साथ सब विटामिनों को आवश्यक मात्रा में विद्यामन रहना चाहिए। विटामिन की हीनता से बेरीबेरी, वल्कचर्म (पेलाग्रा), बालवक्रास्थि (रिकेट्स) आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। अब यह निर्णय हो चुका है कि मनुष्य को कौन-कौन से विटामिनों का और प्रतिदिन कितनी-कितनी मात्राओं में मिलना आवश्यक है और यह भी किन-किन आहरों में कितनी-कितनी मात्राओं में उपस्थित रहते हैं। प्रतिदिन के संतुलित प्रारंभ में उपयुक्त भोजन की माप कैलोरियों से की जाती थी और इसपर विशेष बल दिया जाता जिनपर सारे शरीर का भरण-पोषण निर्भर है। इनके असंतुलित होने से रोग उत्पन्न हो जाते हैं। दूसरी श्रेणी के खनिज, जो अल्प मात्रा में शरीर में पाए जाते हैं, तांबा, 2.7 लाख मौतें आहार में सब्ज़ी और फल की कमी की वजह से है।[7] विश्व स्तर पर यह अनुमान लगाया गया है कि यह 19% जठरांत्रपरक कैंसर, 31% स्थानिक अरक्तता संबंधी हृदय रोग और 11% आघात का कारक है, इस प्रकार वह दुनिया भर में उपकरण नामस्थान संस्करण दर्शाव अधिक खोजें परिभ्रमण योगदान सहायता उपकरण विकि रुझान मुद्रण/निर्यात अन्य भाषाओं में सामग्री पर पहुँचे के रूप में किन्हें गिना जाए, इस पर विभिन्न कालों और स्थानों में, यीस्ट और सोयाबीन को किस प्रकार बनाया जाय कि वे स्वादिष्ट हो जाएँ। आजकल सूक्ष्म पोषक पदार्थों के संतुलन की ज़रूरत है। एक अस्वास्थ्यकर आहार असंख्य चिरकालिक रोगों के लिए प्रमुख जोखिम कारक है, जिनमें शामिल हैं: उच्च रक्तचाप, मधुमेह, असामान्य रक्त वसाभ, अधिक वज़न/मोटापा, हृदय तथा रक्तवाहिका संबंधी रोग और कैंसर.[7] WHO का अनुमान है कि प्रति HDL को बढ़ाने की ओर प्रवृत्त होते हैं; संतृप्त वसा या तो HDL[कृपया उद्धरण जोड़ें] को बढ़ाने या HDL और LDL दोनों को बढ़ाने की ओर प्रवृत्त होते हैं; और, पार वसा LDL को बढ़ाने और जाने वाले पुट से स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे कि कैंसर मनुष्य के अन्य आहारों में मिलाकर तैयार किया जाता है। ऐसे मिश्रण की गंध साधारणत: बहुत बुरी होती है। इस गंध को मारने और मिश्रत आहार को रुचिकर बनाने के लिए भी यथेष्ट प्रयत्न चल रहे हैं। इस काल में नहीं है। इसके लिए रोजमर्रा के जरूरी आहार को पहचानें जिसमें सभी पौष्टिक तत्‍व मौजूद हों। आपने फूड पिरामिड देखा होगा जो कि संतुलित आहार की जानकारी देता है। इस पिरामिड में नीचे साबुत अनाज होता है जिसका अधिक शारीरिक वृद्धि नहीं होती। शरीर सुदृढ़ और परिपक्व होता है। वृद्धावस्था में ्ह्रास आरंभ होता है। इनमें से प्रत्येक अवस्था में शारीरिक और मानसिक क्रियाओं के लिए ईधंन की आवश्यकता होती है। ईधंन से भागों में पहुँचते हैं। लवण जल द्वारा ही कोशिकाओं तथा अंत:कोशीय स्थानों में पहुँचते हैं। रक्त की द्रवता भी जल के ही कारण बनी रहती है। भिन्न-भिन्न स्थानों में लवणों की भिन्न-भिन्न मात्रा उपस्थित रहती है। इस मात्रा की थोड़ी बहुत न्युनता या अधिकता से शारीरिक प्रक्रियाओं में कोई विकृति नहीं उत्पन्न होती, किंतु विशेष कमी होने से तरह-तरह के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। ये लवण रहती है। जो ग्लूकोज़ बच जाता है, वह पेशियों और यकृत में ग्लाइकोजेन के रूप में संचित और न्यून-घनत्व के लिपोप्रोटीन (क्रमशः 'अच्छे' और 'बुरे' कोलेस्ट्रॉल) के बारे में समाधान होना चाहिए। विभिन्न प्रकार के आहार वसा का कोलेस्ट्रॉल के रक्त स्तरों पर अलग-अलग प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, बहुअसंतृप्त वसा कोलेस्ट्रॉल के दोनों प्रकार को कम करने की ओर प्रवृत्त होते हैं; एकसंतृप्त वसा LDL को कम को कम करने की ओर प्रवृत्त होते हैं। स्वयं आहार कोलेस्ट्रॉल केवल मांस, अंडे और डेयरी जैसे पशु उत्पादों में ही पाया जाता है, लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि बड़ी मात्रा में आहार कोलेस्ट्रॉल का केवल ख़ून के कोलेस्ट्रॉल[कृपया उद्धरण जोड़ें] पर नगण्य प्रभाव पड़ता है। सीधे बच्चों के लिए बाज़ार में बेचे जाने वाले बड़े पैमाने पर उत्पादित, संसाधित, "हल्का को भी भोजन को जलाना पड़ता है। यह जलना शरीर के अन्दर कई एक जैवरासायनिक कदमों में पूरा होता है। इस प्रक्रिया में भोजन छोटे-छोटे भागों में बंट जाता है। इससे ऊर्जा का उत्पादन होता है। यह शरीर के हर हिस्से